छत्तीसगढ़ी कहानी- बगरत नवां अंजोर



आंड़ी के कांड़ी कुछु करना नइ हे अउ चोक्खा ससुरार म पलना ओला बने लागथे. अइसन कतको मनखे हें जेन अलम-ठलमम अपन जिनगी पहवा देथें. कुछु कहिबे त दांत गिजोर देथें. आगू चलके इन ल सरकार पोसथे. सरकारी दमाद बन के जीना कतको झन बर बड़ गरब के बात होथे. सरकार त आखिर म सबे के घोषित दाई-ददा आय. काम-बुता करे बर सरम आथे.



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