झीरम नरसंहार: एक बार फिर से खुली फाइल, 6 साल पहले 29 लोगों की हुई थी हत्या-Jhiram massacre File opened again 29 people were killed 17 years ago | raipur – News in Hindi


झीरम घाटी नरसंहार: फिर से खुली फाइल, 6 साल पहले 29 लोगों की हुई थी हत्या

झीरम घाटी नक्सली हत्याकांड में 29 लोग मारे गए थे. (File Photo)

कांग्रेस सरकार ने झीरम की घटना की जांच दोबारा करने के लिए एनआईए (NIA) से दस्तावेज देने के लिए कई बार केन्द्रीय गृह मंत्रालय से दस्तावेज देने की मांग की, लेकिन एनआईए ने दस्तावेज देने से माना कर दिया था. अब एनआईए पीड़ितों का बयान दर्ज कर रही है.

रायपुर. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आए 15 महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बावजूद अभी तक झीरम (Jhiram Ghati Attack) की घटना का सच सामने नहीं आ पाया है. कांग्रेस सरकार (Congress Government) ने सत्ता में आने के बाद झीरम की घटना की जांच के लिए अलग से एसआईटी का गठन किया. उसके बाद राज्य की कांग्रेस सरकार ने झीरम की घटना की जांच दोबारा करने के लिए एनआईए (NIA) से दस्तावेज देने के लिए कई बार केन्द्रीय गृह मंत्रालय से दस्तावेज देने की मांग की, लेकिन एनआईए ने दस्तावेज देने से माना कर दिया. लेकिन अब एक बार फिर से एनआईए ने इस घटना की जांच के लिए फाइलों के पन्नों को खोलना शुरु कर दिया है.

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार को शुरू से ही एनआईए जांच पर भरोसा नहीं रहा है. एनआईए ने 6 साल साल पहले हुए झीरम घाटी के नक्सली हमले की जांच कर चार्जशीट दाखिल कर दिये थे. इस हमले में अलग-अलग 88 नक्सलियों का हाथ बताया गया था. 2015 में इसी मामले को लेकर एनआईए ने एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की थी.

29 लोगों की हुई थी हत्या

दरअसल 25 मई 2013 को सूबे के कद्दावर नेताओं समेत कुल 29 लोगो को नक्सलियों ने अपनी गोलियों का निशाना बनाया था. इस हमले में तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंद कुमार पटेल समेत 29 लोग मारे गए थे. उसके ठीक साढ़े पांच साल के बाद सूबे में कांग्रेस की सत्ता वापस आयी और इस पूरे मामले की जांच एसआईटी से कराने की घोषणा भूपेश सरकार ने थी.पीड़िता ने कहा-घटना की याद आते ही सिहर उठती है

भूपेश सरकार ने एनआईटी से दस्तावेज मांगी थी. एनआईए ने सरकार को दस्तावेज देने से इंकार कर दिया था. लेकिन अब 6 साल बाद एनआईए ने फिर से झीरम के पीड़ित दौलत रोहरा समेत अन्य लोगों को बुलाकर फिर से बयान लेना शुरू किया है.वर्तमान में राज्यसभा सांसद और झीरम की घटना की पीड़िता फूलो देवी नेताम जब उस समय की घटना को याद करती है तो वो सिहर जाती हैं. उनका कहना है कि पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए और निष्पक्ष जांच करने की मांग कर रही हैं.

सूबे की कांग्रेस सरकार ने झीरमघाटी की विस्तृत जांच कारने के लिए एसआईटी के गठन के लिए करने के आदेश जारी किया था. कांग्रेस सरकार ने झीरमघाटी की घटना की एनआईए की जांच के दस्तावेज मांगी थी. लेकिन एनआईए ने इस मामले से जुड़े दस्तावेजों को देने से मना कर दिया. एनआईए को पहले ही जागना चाहिए था लेकिन वो नहीं जागी. अब पता नहीं क्यों फिर से एनआईए पीड़ितों के बयान दर्ज करवा रही है.

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First published: March 20, 2020, 1:30 PM IST





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